Miss u dada ji
" जिदांदिल जिदंगी "
तुमने जीवन जीया जैसे, सचमुच एक करिश्मा था।
इतने रिश्ते निभा गये तुम,किसमे भला ये जिगरा था।
तेरे त्वरित फैसलों पर तो,आज भी वारे जाते है।
समय इंतजार नहीं करता,ये सीख उसी से पाते हैं।
तिनका तिनका जोड़ के तुमने,घर संसार बनाया था।
अनुशासन की आग में, इस सोने को खुब तपाया था।
रास नहीं आता था तुमको,जीवन में कोई बन्धन,
निर्बाध गति की जीवनशैली, तुमको सदा रही पसंद।
माना समय उचित नहीं था,इतनी जल्दी जाने को।
पर भला रोक पाया है कौन,ऐसे जिद्दी तुफानों को।
लोगों ने माना तोड़ के तुम,रिश्तों का बन्धन चले गये।
मैनें माना रौशन कर इस घर को,कहीं और अलख जगाने निकल गये।
" शत् शत् नमन "
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